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Wednesday, 30 August 2017

बाबा रामदेव पर अंगुली उठाने वालों को संदेश

हमारे जीवनकाल के दो महान संत, जिन्होंने भारत ही नहीं भारतीयता को जीना पूरे विश्व को सिखाया।

जितने भी बाबा देख लो .. आसाराम से लेकर 'रहीम बाबा' तक , ये सारे आपको आशीर्वाद देते हुए मिलेंगे. इनके फोटो भी ऐसे ही बेचे जाते है जिसमें ये भक्तों को आशीर्वाद देकर मोक्ष प्रदान कर रहे हो ....

.. सिर्फ दो संत ऐसे हुए है जो लोगों को मोक्ष और आशीर्वाद नही देते थे या देते है ..उन्हें जीने का तरीका बताते है . ओशो(रजनीश) और बाबा रामदेव.  ओशो तो एैसे एकलौते संत है जो अपने अनुयायियों का अभिवादन हमेशा हाथ जोड़ कर करते थे ना कि आशीर्वाद बरसा कर !

एक ने ध्यान को जन-जन तक पहुँचाया और दूसरे ने योग और आयुर्वेदिक दवाओं को. ध्यान और योग के बारे में सभी बरसों से जानते है लेकिन आम लोगों को ये 'दुर की कौड़ी' ही लगता था. इन दोनों संतों को ध्यान और योग + आयुर्वेदिक दवाओं को तिलिस्म से बाहर निकालकर सधारण जन तक पहुँचाने का श्रेय जाता है.

हरड़ , कालीपीपल , छोटी पीपली , अमलतास , बहेडा , सोंठ , मुलेठी जैसी अनगिनत जड़ीबूटियों और वनस्पतियों के नाम सबने सुने थे और ये भी सबको पता था कि कौन सी बीमारी में किसका प्रयोग करने पर फायदा होता है लेकिन सबसे पहले तो पन्सारी की दुकानों पर भटककर इन औषधियों को खरीदना फिर इनको मिलाकर दवा बनाना हर किसी के बस की बात नही थी. नीम की एक दातून तोड़कर लाना ही किसी शहरी बन्दे के बस की बात नही थी तो ये सब तो बहुत दुर की बात है. जानते सब थे कि ये आयुर्वेदिक दवाये बहुत फायदेमंद है. बाबा रामदेव ने हमारी इसी मुश्किल को आसान कर दिया. हर बीमारी की आयुर्वेदिक दवायें बनाकर कम से कम कीमत में हमारे सामने रख दी. लोगों को मुँह माँगी मुराद मिल गई .. उनका काम आसान हो गया . यही है बाबा की सफलता का राज.

अब वापस आते है ओशो पर. कई कुतर्कीयो के मन में एक ही सवाल गूँज रहा होगा .. अरे वही ओशो .. फ्री सेक्स वाले , 'सम्भोग से समाधि' तक वाले ? अगर आपके मन में सिर्फ यही दो सवाल है तो माफ करना .. आप ओशो को .001% भी नही जानते. ओशो की लिखी अनगिनत किताबों में से वो सिर्फ एक किताब है .. और हाँ .. अगर आपने वाकई में यही एक पुस्तक भी ढंग से , कायदे से , तसल्ली से पढ़ी होगी तो .. आप ये सवाल नही करेंगे.

ओशो अकेले ऐसे संत थे जिनके पीछे काँग्रेस सरकार पूरी ताकत से लगी हुई थी . तब पूरे देश में काँग्रेस की ही सरकार हुआ करती थी. अगर ओशो अपने आश्रम में सिर्फ सेक्स पर जोर दे रहे थे या कुछ गलत कर रहे थे तो काँग्रेस सरकार अपनी एजेंसियों के माध्यम से एक सिर्फ एक केस भी बनवाकर अपना हित साध सकती थी लेकिन एैसा नही हुआ. ओशो दुनिया के अकेले एैसे संत थे जिनके पीछे अमेरिकन खुफिया एजंसी CIA लगी हुई थी. एक ध्यान और जीवन सिखाने वाले संत को दर्जनों ईसाई देशों ने अपने यहाँ आने पर पाबंदी लगा थी. अमेरिका के जेल में ही उन्हें लगातार धीमाज़हर दिया गया जिससे बाद में असमय उनकी मृत्यु हो गई. ये सब कांग्रेसी सरकार की सहमति से हुआ था. ईसाई देशों और चर्च को खौफ था ओशो से कि ये आदमी तो हमारी जड़े हिला देगा. जिन्होने ओशो को कभी नही पढा वो उन्हें ज़रूर पढ़े.

पोस्ट इसलिये लिखी है कि कूछ लोगों ने बाबा रामदेव पर उँगली उठाना शुरू कर दिया है कि अगला नम्बर इनका होगा. ये लोग आशाराम और रहीम जैसे धूर्तों को तो पहचान नही पाये और चले है एक योगी पर उँगली उठाने. हद है यार बकवास की भी.
अज्ञात लेखक ..