थपकी जो देती देती,थकती नहीं है कभी,
उन्नीदी आंखों में रोज,सपने सजाती मां!
गायें कभी लोरी तो,सुनाती है कहानी कोई,
सुलझी हुई कोई कहानी,बन जाती मां ।
तोतली जुबान में सिखाती,सच बोलना जो,
मातृभाषा जननी का,रूप धर आती मां!
"वीनू" जब घुटनो के बल से खङे हुये तो,
मातृभूमि पदचाप धरना सीखाती मां!
विनोद दाधीच"वीनू"७०४८४५३६८३

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