Wednesday, 22 February 2017

मातृभाषा दिवस पर विशेष



थपकी जो देती देती,थकती नहीं है कभी,
उन्नीदी आंखों में रोज,सपने सजाती मां!
गायें कभी लोरी तो,सुनाती है कहानी कोई,
सुलझी हुई कोई कहानी,बन जाती मां ।
तोतली जुबान में सिखाती,सच बोलना जो,
मातृभाषा जननी का,रूप धर आती मां!
"वीनू" जब घुटनो के बल से खङे हुये तो,
मातृभूमि पदचाप धरना सीखाती मां! 

विनोद दाधीच"वीनू"७०४८४५३६८३

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